अध्याय 170

समर की POV

शुक्रवार सुबह फोन के अलार्म से मेरी आँख खुली, और दिमाग में सबसे पहला खयाल यही आया: आज मेरा बर्थडे है। मेरा अठारहवाँ बर्थडे।

मेरी पुरानी ज़िंदगी में, ये दिन जैसे सायों में गुम हो जाता था—माँ जेल में, कंपनी तबाह। मैं उस खाली से ब्राउनस्टोन घर में अकेली बैठी रहती, फोन को घूरती, और उन...

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